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अप्रैल, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कुलिष्ट देवी- देवता परंपरा का क्षरण

प्रश्नोत्तर -2  बुजुर्गों से सुना है कि हमारे  कुलिष्ट  देवी -देवता बहुत शक्तिशाली होते है । वह आशीर्वाद और दंड देने मे सक्षम होते । कुलदेवता परिवार में शादी विवाह , संतान, भू तक़सीमी , चुनाव में जीत ,रोगनाश ,वर्षा-बर्फ, युद्ध विजय   का आशीर्वाद और दुष्ट का कुल खानदान समाप्त करने का तुरंत निर्णय करते रहे । उत्तर -2 सही 100%, परंतु इस नए अशिष्ट समय में माँ -बाप अपनी संतानों को झूठ , आलसी ,अश्लीलता  , नशा ग्रस्त देख कर देव-देवी  के पारिवारिक रिवाज नीयम से अवगत नहीं करवाते ।आधुनिक पढ़े लिखे ,नोकरी पेशा  युवक- बच्चे देवी देवता के गूर ,देवा ,बाजकी,पुजारी, पुरोहित ,भण्डारी,पलघेरी, जो कि अलग अलग जातियों के होते हें , की आज्ञा पालन व सम्मान नहीं करते  साथ ही देवी -देवताओं की भूमि को  सरकार ने  मुजारों को बाँट दिया या खुद कब्जा कर लिया ।  इससे पुजारी ,देवा ,गूर ,पलघेरी ,भण्डारी ,पुरोहित , सहायकों को मिलने वाली आय समाप्त हो गई ।जो लोग मंदिर के  खेतों में मुफ्त सेवा करके मंदिर की आय बढ़ते थे वो क्या करते ?  देव स्थानों में अनुष्ठान...

दुनियाँ की महामारी

 सनातन धर्म शिक्षा और महामारी परिहार  ये वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना महामारी ने पूरी दुनियाँ को ग्रसित किया है परंतु दुनियाँ में सनातन धर्म के शिक्षक और शिक्षा , प्रयोग ,उपयोग न होने से भयानक परिणाम आ रहे । सनातन धर्म में जो जीवन प्रयोग हजारों वर्ष पूर्व दिये गए वो आज भी प्रासंगिक हें । जैसे  1)  हाथ जोड़ कर  नमस्ते  2)  अलग -अलग समय में मंदिरों में जप और साधना  3)  अग्नि दाह संस्कार  4)  स्वयं पाकी तपस्वी , जूठन  ,स्पर्श  का परहेज  5)  भोजन पाचक का विशेष प्रावधान , हर कहीं खाने से परहेज                                                                                  धन्यवाद                                        ...

प्रश्नोत्तर-1a

 प्रश्न : तपस्वी  कितने प्रकार के होते हें ? उत्तर : 3 प्रकार के  1) सात्विक   :  अहिंसक , जीवनपर्यंत  मनुष्यों ,जीव जंतुओं का भला करने  वाले , सभी नशे  और विषय विकार से दूर रहने वाले , निंदा -स्तुति से निर्लेप , काम-क्रोध -लोभ-मोह-अहंकार से विमुक्त होते हें । उदाहरण त्रेता में  ऋषि वशिष्ठ  और कलयुग में  संत श्री आशाराम जी बापू जो सभी नशे , भिक्षा वृत्ती के विरूद्ध रहे । जो प्रशासन ,शासन षड्यंत्रकारी उनको मिटाना चाहते हें उनका भी बुरा नहीं करते /चाहते । वह सनातन के 4 वेद ,6 शास्त्र ,18 पुराण ,भारत के ऋषि मुनियों की कथाओं का गुणगान करते और अपने शिष्यों से करवाते हें । वह सभी कष्टों का खुद सामना कर रहे हें । ईश्वर उनकी वाणी को तुरंत सिद्ध करते हें ।  2) राजसी  :       यह उच्च श्रेणी के आश्रमधारी , हठ योगी ,राज सत्ता के हिमायती , सुख समृद्धि के चाहने वाले , जाती ,धर्म और दौलत, पद,परिवार  के आधार पर शिष्य बनाने वाले । सत्ता से उनकी वृत्ति के अनुसार हिमायत या टकराव ।ये  शस्त्र ,शास्त्र,तप ,भ्रमण ,द...