देश को दी गई विदेशी शिक्षा का असर।
भारतीय समाज को भारतीय शिक्षा से अनभिज्ञ रखा गया। भारतीय शिक्षा में प्रयोग करने और प्रभाव देखने की प्रवृत्ति थी जो विदेशी शिक्षा से समाप्त हो गई।
उदाहरण के लिए जो स्त्री - पुरुष दुष्ट /अपराधी / अधर्मी होता है उसका वर्तमान और भविष्य बिगड़ जाता है साथ ही जो डरपोक लोग ( जनता), दुष्ट /अपराधी / अधर्मी का साथ देती है ,उनका वर्तमान और भविष्य बिगड़ जाता है।
आज के समय में हमारी भारतीय सत्यवादी रिवाजें जो वेद और पुराण के अनुसार थी का विनाश हुआ तो प्रकृति भूकंप ,ओलावृष्टि ,बिजली गिरना,पहाड़ों का दरकना , बदल का फटना , बाढ़ ,सूखा ,आग ,महामारी , बुद्धि भ्रष्ट अदि से जनसँख्या त्रस्त है।
प्रभाव देखें
१) मुस्लिम कट्टर अफगानिस्तान और अन्य देशों में जहाँ अल्पसंख्यकों -महिलाओं पर अत्याचार हुए तो उधर वर्षों हो गए बन्दूक ,बम , बारूद से रोज सभी वर्गों के लोगों का संहार जारी है।
२) सोमालिया जैसे देश में लूट-पाट ही एजेंडा है तो वहां प्रतिदिन का सभी वर्गों का जीना दूभर है।
३) आयरलैंड में लोकतंत्र है ,लोग एक दूसरे का सम्मान करते और तुरंत सहायता लिए खड़े रहते तो वहां प्रतिदिन सुबह धूप चमकती और दोपहर बाद धीमी वर्षा होती। वहां ताज़ी सब्जी ,दूध खूब है और प्रकृति ने लगभग किलोमीटर पर पानी के स्रोत दिए हैं।
४) हिमाचल देव भूमि है परन्तु यहाँ की सरकारों ने देवी -देवताओं के मंदिरों की भूमि को मुजारों को बाँट दिया जिससे मंदिरों की आय समाप्त हुई ,परन्तु वक्फ बोर्ड / मदरसों और चर्च भूमि की सरकार देखभाल रखती है। वहां प्रवासी भी दिनों दिन बढ़ते हैं। हिमाचल के बड़े मंदिरों का सरकार ने अधिग्रहण किया परन्तु अन्यों का नहीं।
सोलन के शिल्ली में जगन्नाथ मंदिर की लगभग ६०० बीघा जमीन में मुजारों को मालिक बना दिया परन्तु पुजारी जी जिसकी १६वीं पीढ़ी कारदार पुजारी वह मालिक नहीं बना है। परन्तु वक्फ बोर्ड / मदरसे /चर्च की खाली जमीनें स्थानीय लोगों को मालिकाना हक़ नहीं दिया।
अतः विदेशी शिक्षा ने भारतियों में गुलामी ही भरी है , सत्य ,ईमानदारी ,समाप्त हो रही है। समाज के लोग अन्याय के विरुद्ध आवाज नहीं उठा पाते।
संतोष कुमार भारद्वाज
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