मानव के ६ /कर्म -कृत्य 

 ऐसा एक साधारण मानव पूर्व जन्म कृत कर्मों के फलस्वरूप ,रीतिरिवाज जिसमे जन्मा है,जैसी शिक्षा दीक्षा हुई ,देश,वेष ,काल ,परवरिश के अनुसार करता है। 

१) देव /ऋषि : यदि वह पवित्र,सत्य ,जप ,तप ,ईश्वर का ध्यान ,सेवा ,आश्रितों की सुरक्षा व् सतोगुण से भरपूर दिव्यता सहित क्षमतावान हो । समाज को सदैव अध्यात्म तथा सत्य का साथ देने का ज्ञान दे. 
ध्यान रहे देव /ऋषि क्षमतावान होता है और उसकी कभी अकाल मृत्यु नहीं होती। असुरता से सुरक्षित रहते हैं। यह सिद्ध होकर जन्म  लेते हैं। आशीर्वाद और दंड देने में सक्षम होते हैं। 

२)विप्र /ब्राह्मण   ;देव /ऋषि  वेद, पुराण  के अनुसार धर्म ,अर्थ , काम , मोक्ष ज्ञान तथा  सत्ता  निर्धारित  शिक्षा जिसमे समाज ,न्याय , ज्ञान ,विज्ञान,शस्त्र अदि का ज्ञान अर्जित करना और उसका प्रसार करना।
समाज और राजा इन्हें  मनमुखि शिक्षा देने का दबाव डाल सकते हैं।  धन और सम्मान के लिए ये असुरता अपना सकता है। 

३) क्षत्रिय : जब कोई व्यक्ति न्याय सहित परिवार,गांव ,नगर ,राज्य,देश को आंतरिक और बाह्य सुरक्षा देने में तत्पर हो।  अस्त्र ,शस्त्र , राजकरण विद्या का प्रयोग करने में क्षमतावान तथा दान वीर हो।निर्दोष ,सुपात्र , निर्बल ,गरीब  को सुरक्षा और राक्षसों ,असुरों को दंड देने में सक्षम हों। नेता ,राजा ,सम्मान प्राप्ति के लिए असुरता इनमें भी घुसपैठ कर सकती है।  

४) वैश्य : परिवार, गांव ,शहर , राज्य ,देश  को कृषि, व्यापर , उद्योग  में तत्पर ,प्रवीण हो तथा प्रसार करने में सक्षम हो। स्वार्थ के लिए इनमें भी असुरता आ सकती है। 

५) शूद्र ) ; वही एक व्यक्ति जब राज्य, समाज द्वारा निर्धारित विभिन्न सेवा करता है। इसमें कानून ,रीती ,निति राज्य या समाज की होती हैं।  उसे तो पालन का दायित्व है।यदि  यह स्वयं निर्णय ,नीति - अनीति का भेद करने में अक्षम हों तो इनमे भी असुरता आ  सकती है। 

६) असुर /राक्षस ; यदि  व्यक्ति काम ,क्रोध ,लोभ , मोह ,अहंकार के वशभूत होकर परिवार ,समुदाय ,गांव ,राज्य ,देश को अपने मन का कानून बनाकर गुलाम बनाये , अत्याचार , झूठ ,लम्पट , कपटी होकर दुराचार करे वह अपने को ही भगवान बताये या अपने वाले को ही असली भगवान और पूजा पद्दति  बताये तो वह असुर होता है। 

अर्थात मानव के उपरोक्त कृत्य जन्म से नहीं कर्म से माने जाते है परन्तु भारत में फिजूल जाती ,संप्रदाय में लोगों को बांटा जाता है।  इससे मानव में  देवत्व की जगह असुरता घुसपैठ कर सकती है। 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मानव के ६ /कर्म -कृत्य

Know Bhagwad Geeta3/9

दैवी या आसुरी कृत्य भारत की एक खोज