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प्रश्नोत्तर-3

प्रश्न 3     साधू / सन्यासी कोन बनता है ? क्यों बनता है ? उत्तर :  मेरा अनुभव है कि साधू सन्यासी बनने के लिए ईश्वर की सत्ता का विभिन्न रूपों /स्थानों में जिसने स्वयं अनुभव किया हो वही यह रिस्क लेता  है । एक उदाहरण है मेरे अपने तायाजी श्री सीता राम भारद्वाज जी का ,वह 1962 के युद्ध में सैनिक ,असलहा ,गोला बारूद ले जाने वाले निजी ट्रकों के काफिले के अध्यक्ष थे । उस युद्ध को उन्होंने , स्वयं अनुभव किया और  सन्यासियों की तपस्या शक्ति से   कठिन रास्तों को सरल होते देखा । बाद में वह जटोली ( सोलन) वाले महात्मा , करोल  वाले नागा बाबा के संपर्क में आए ।उसके बाद तलहर वाले बाबा जो कि उस वक्त उनको 1857 के संघर्ष ,और उसके बाद के जौनाजी क्षेत्र के 5 पुश्त पहले के बुजुर्गों से संबंध की बातें की,उनकी करी प्रणाली बताई । तलहर के महात्मा जी  आगंतुकों को गेट से बाहर से ही भगा देते थे ,परंतु ताया जी को उन्होने 

कुलिष्ट देवी- देवता परंपरा का क्षरण

प्रश्नोत्तर -2  बुजुर्गों से सुना है कि हमारे  कुलिष्ट  देवी -देवता बहुत शक्तिशाली होते है । वह आशीर्वाद और दंड देने मे सक्षम होते । कुलदेवता परिवार में शादी विवाह , संतान, भू तक़सीमी , चुनाव में जीत ,रोगनाश ,वर्षा-बर्फ, युद्ध विजय   का आशीर्वाद और दुष्ट का कुल खानदान समाप्त करने का तुरंत निर्णय करते रहे । उत्तर -2 सही 100%, परंतु इस नए अशिष्ट समय में माँ -बाप अपनी संतानों को झूठ , आलसी ,अश्लीलता  , नशा ग्रस्त देख कर देव-देवी  के पारिवारिक रिवाज नीयम से अवगत नहीं करवाते ।आधुनिक पढ़े लिखे ,नोकरी पेशा  युवक- बच्चे देवी देवता के गूर ,देवा ,बाजकी,पुजारी, पुरोहित ,भण्डारी,पलघेरी, जो कि अलग अलग जातियों के होते हें , की आज्ञा पालन व सम्मान नहीं करते  साथ ही देवी -देवताओं की भूमि को  सरकार ने  मुजारों को बाँट दिया या खुद कब्जा कर लिया ।  इससे पुजारी ,देवा ,गूर ,पलघेरी ,भण्डारी ,पुरोहित , सहायकों को मिलने वाली आय समाप्त हो गई ।जो लोग मंदिर के  खेतों में मुफ्त सेवा करके मंदिर की आय बढ़ते थे वो क्या करते ?  देव स्थानों में अनुष्ठान...

दुनियाँ की महामारी

 सनातन धर्म शिक्षा और महामारी परिहार  ये वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना महामारी ने पूरी दुनियाँ को ग्रसित किया है परंतु दुनियाँ में सनातन धर्म के शिक्षक और शिक्षा , प्रयोग ,उपयोग न होने से भयानक परिणाम आ रहे । सनातन धर्म में जो जीवन प्रयोग हजारों वर्ष पूर्व दिये गए वो आज भी प्रासंगिक हें । जैसे  1)  हाथ जोड़ कर  नमस्ते  2)  अलग -अलग समय में मंदिरों में जप और साधना  3)  अग्नि दाह संस्कार  4)  स्वयं पाकी तपस्वी , जूठन  ,स्पर्श  का परहेज  5)  भोजन पाचक का विशेष प्रावधान , हर कहीं खाने से परहेज                                                                                  धन्यवाद                                        ...

प्रश्नोत्तर-1a

 प्रश्न : तपस्वी  कितने प्रकार के होते हें ? उत्तर : 3 प्रकार के  1) सात्विक   :  अहिंसक , जीवनपर्यंत  मनुष्यों ,जीव जंतुओं का भला करने  वाले , सभी नशे  और विषय विकार से दूर रहने वाले , निंदा -स्तुति से निर्लेप , काम-क्रोध -लोभ-मोह-अहंकार से विमुक्त होते हें । उदाहरण त्रेता में  ऋषि वशिष्ठ  और कलयुग में  संत श्री आशाराम जी बापू जो सभी नशे , भिक्षा वृत्ती के विरूद्ध रहे । जो प्रशासन ,शासन षड्यंत्रकारी उनको मिटाना चाहते हें उनका भी बुरा नहीं करते /चाहते । वह सनातन के 4 वेद ,6 शास्त्र ,18 पुराण ,भारत के ऋषि मुनियों की कथाओं का गुणगान करते और अपने शिष्यों से करवाते हें । वह सभी कष्टों का खुद सामना कर रहे हें । ईश्वर उनकी वाणी को तुरंत सिद्ध करते हें ।  2) राजसी  :       यह उच्च श्रेणी के आश्रमधारी , हठ योगी ,राज सत्ता के हिमायती , सुख समृद्धि के चाहने वाले , जाती ,धर्म और दौलत, पद,परिवार  के आधार पर शिष्य बनाने वाले । सत्ता से उनकी वृत्ति के अनुसार हिमायत या टकराव ।ये  शस्त्र ,शास्त्र,तप ,भ्रमण ,द...

शस्त्र लाइसेंस

हिमाचल प्रदेश एक सीमावर्ती प्रदेश है जिसकी सीमा चीन के साथ लगती है। हिमाचल प्रदेश की सीमा जम्मू कश्मीर के साथ  लगती है।  जम्मूकश्मीर  वह  क्षेत्र है जहाँ कुछ आबादी पाकिस्तानी आतंकवादियों को पनाह देती रही है  इन आतंकवादियों ने आधुनिक हथियारों से कश्मीरी पंडितों ,सुरक्षा बलों का संहार किया।  इस समय चीन और पाकिस्तान  जम्मू कश्मीर , लद्दाख क्षेत्र  में आतंकवादियों की घुसपैठ करवाता रहता है।  जिससे हिमाचल की शांत आबादी खतरे में रहती है।  अतः हिमाचल के ऊर्जावान ,शक्तिवान पूर्व सैनिक , एन ० सी ०सी   B,C ,certificate वाले  , पूर्व पुलिस , सुरक्षा बल  वाले इच्छित हिमाचल के मूल निवासियों को शस्त्र लाइसेंस प्रदान करें।  प्रत्येक दूर दराज के सभी घरों में हथियार रखना आवश्यक होना चाहिए। हमारे बुजुर्ग कहते थे कि युद्ध से  पहले भी  हिमाचल- पंजाब के   सभी घरों में  बन्दूक रखने  और सरकारी स्तर पर  चलाने  का प्रशिक्षण दिया जाए।  धन्यवाद।...

हमारे पूर्वज , वीर और जंगल , पशु - पक्षियों के मित्र

केवल ५० वर्ष पूर्व  गांव पनेवा ( जौणा जी ) सोलन  के श्री लक्ष्मीनंद शर्मा  (पिता श्री इंद्र दत्त शर्मा) ताया जी श्री गंगा दत्त शर्मा /गणेश दत्त शर्मा  श्याहाग जंगल के गुफा / बेशक में  जंगल मैदान में श्रावण और भादों महीनो में पत्नी सहित रात - दिन रहते थे। वह ४-५ भैंसें दिन में चराते थे और दूध/खोया  सहेजते थे।  उनके बच्चे  जंगल आकर दूध, घी , खोया अदि ले जाते थे और गुड़ ,चाय पत्ती , आटा ,चावल, अदि छोड़ जाते।  उस  जंगल में पड़ोसी और भाई-बंडार की भैंसें भी चरा देते थे। बेटा - बहु -बच्चे गांव में  रहते थे।  इसी समय गावं कलोग -मही ( कंडाघाट ) के मनसा राम शर्मा /हरी राम शर्मा ( पिता श्री ओम प्रकाश शर्मा पिता श्री हरीश शर्मा ) भी करोल के जंगल में बेशक बना कर आषाढ़ से आसोज तक ४ महीने   शाम , दोपहर , रात्रि को ५-७ भैंसों को चराने के लिए  रहते थे , सुबह दूध लेकर गांव आते थे।  दोनों गांव के बुजुर्गों  द्वारा  जंगल में पेड़ों और जंगली जानवरों से प्यार करना ,आवाजें देना इनकी आदत रही है।  प...

सिंगल प्रयुक्त पॉलिथीन

नमस्कार  सरकार द्वारा निर्देश दिया गया है ,सिंगल प्रयुक्त पॉलिथीन  का प्रयोग बंद करना  है ,परन्तु प्लास्टिक ,कुछ पॉलिथीन प्रयोग होता रहेगा। इसके लिए आपसे अनुरोध है कि सभी राज्य सरकारों / प्रशासन को आदेश दिया जाये कि प्रयोग करने के उपरांत बेकार पॉलिथीन ,प्लास्टिक नए प्लास्टिक/पॉलिथीन  से आधे दाम  पर  पंचायत ,नगर ,शहर स्तर पर ख़रीदा जाये और उसका पुनः प्रयोग निर्माण उद्योग अवश्य करे।  इससे संसाधन का सस्ता उपयोग होगा और देश को स्वच्छ रखने में मदद के साथ रोगाणु से जनता निपट सकेगी।                                                                                               धन्यवाद                                    ...

देश को दी गई विदेशी शिक्षा का असर।

 भारतीय समाज को भारतीय शिक्षा से अनभिज्ञ रखा गया।  भारतीय शिक्षा में प्रयोग करने और प्रभाव देखने की प्रवृत्ति थी जो विदेशी शिक्षा से समाप्त हो गई।  उदाहरण के लिए जो स्त्री - पुरुष  दुष्ट /अपराधी / अधर्मी  होता है उसका  वर्तमान और  भविष्य बिगड़ जाता है  साथ ही  जो डरपोक  लोग ( जनता), दुष्ट /अपराधी / अधर्मी  का साथ देती है ,उनका वर्तमान और भविष्य बिगड़ जाता है।  आज के समय में हमारी भारतीय सत्यवादी रिवाजें जो वेद और पुराण के अनुसार थी का विनाश हुआ तो प्रकृति भूकंप ,ओलावृष्टि ,बिजली गिरना,पहाड़ों का दरकना , बदल का फटना , बाढ़ ,सूखा ,आग ,महामारी , बुद्धि भ्रष्ट अदि से जनसँख्या त्रस्त  है।  प्रभाव देखें  १) मुस्लिम कट्टर अफगानिस्तान और अन्य देशों में जहाँ  अल्पसंख्यकों -महिलाओं पर अत्याचार हुए तो उधर वर्षों हो गए  बन्दूक ,बम , बारूद से रोज सभी वर्गों के लोगों का संहार जारी है।  २) सोमालिया जैसे देश में लूट-पाट ही  एजेंडा है तो वहां प्रतिदिन का सभी वर्गों का जीन...

हिमाचल के रामलोक में तपस्वी श्री अमर देव

हिमाचल के रामलोक  में तपस्वी श्री अमर देव हिमाचल के कंडाघाट -कालीटिब्बा क्षेत्र में १०-१२ वर्ष की उम्र में रामभक्त अमरदेव जी का आगमन हुआ वह साधारण परिवारों में निवास करते और रामचरितमानस  पाठ करते ,उनकी तपस्या साधना प्रभाव से  लोगों ने उन्हें रूडा (कलहोग )कंडाघाट में कुटिया बना दी। उनके आशीर्वाद ,तपस्या का प्रकाश फैलने लगा और भक्तों की वृद्धि हुई ,लगभग २५-३० वर्ष की उम्र में दशहरा संघ पथसंचलन के मुख्य वक्ता बने।  उनकी कुटिया में मुख्य मंत्री  व् अन्य  मंत्रियों का भी आगमन होता रहा। उनके साधक  शिष्यों ने भगवान्  राम , नव ग्रहों , माँ दुर्गा , माँ भीमा काली और अन्य देवताओं का भव्य मंदिर निर्माण किया है। भव्य स्वर्ण मूर्तियां स्थापित की है। श्री अमरदेव दिव्य अनुभव के स्वामी है और वह संत श्री आशारामजी बापू के बारे में वह स्पष्ट कहते  है कि वह महान संत है और राजकीय तंत्र की ऑंखें फटी है ,जो प्रताड़ना कर रहे हैं। राम भक्त श्री अमरदेव जी उग्र स्पष्ट वक्ता हैं  इसलिए कई छुट भैया नेता उनके विरोधी रहे ,छापे डलवाए , हमला किया ,महिला केस भी किया...

गरीब रहो ,चुपके जमीन बेचो , नशा करो , परिवार का शोषण करो अभियान।

                                                             हिमाचल प्रदेश में सरकार ने हिमाचली किसानो की शामलात भूमि  भूमिहीनों को  और हिमाचली किसानो  की भूमि में जोत करने वाले  बटाइ मजदूर ( मुजारों ) को  जमीन दिलवाई , उन्हें मालिक बनाया। अनेक साधन  संपन्न नशेड़ी किसान / परिवार को छोड़ दूसरे  स्थान में बसे  भूस्वामियों ने  और गरीबों ने अपनी हिमाचली भूमि को चुपके चुपके बेचने का अभियान चलाया हुआ है।  इससे प्रभावित परिवार गरीब हो रहे है।  ओना-पोना पैसा पारिवारिक लड़ाई, मुकदद्मे , और शोषण को जन्म  दे रहा है।  अतः सरकार से अनुरोध है कि सरकार द्वारा भूमिहीन और मुजारों को एलाट भूमि को कभी बेचीं न जा सके।  उनके घरों पर BPL की तरह सरकारी भूमि एलाट   बोर्ड लगे। इसके इलावा जो भी हिमाचली पैतृक भूमि बेचना चाहे उसे पत्नी /पति बच्चों से अनापत्ति...

आश्रम /मंदिर जाना जरुरी क्यों ?

मनुष्य जो सोचता है , जिसकी संगती करता है ,जिसके दर्शन करता है, जिसकी बातें सुनता है , वह  उसकी तरह ही बनता रहता है , उसीके गुणों /अवगुणो   का समावेश  होता रहता  है।--- भगवान श्री कृष्ण  इसी प्रकार यदि कोई स्त्री /पुरुष   मंदिर जाये  तो हिन्दू मंदिर में गुरु/ देव/ देवी के मूर्त /स्थान के  दर्शन होंगे जो अवश्य ही  वीर ,गंभीर , शक्तिवान , तेजस्वी , आकर्षक ,ऊर्जावान चरित्र के स्वामी/स्वामिनी होंगे।  उसका सीधा असर पड़ेगा।  यदि कोई इसका प्रयोग करे तो प्रमाण मिलेगा।                                                                                                                                 ...

वीर सावरकर ( विनायक दामोदर सावरकर) एक वीर चिंतक नेता

वीर सावरकर ( विनायक दामोदर सावरकर) एक वीर चिंतक नेता  भारत देश जब सोने की चिड़िया था उस समय इच्छुक ऊर्जावान वीर  नौजवान राजकाज , पुलिस , सेना ,सुरक्षा बल, प्रशासक ,शिक्षण -प्रशिक्षण  का कार्य करते थे। भारत के गुलाम होने पर यह संख्या घटती रही और विदेशी लोग सभी क्षेत्र में कमांडर ,शिक्षक-प्रशिक्षक ,प्रशासक बनते रहे। बन्दूक ,तोप ,गोला बारूद का जखीरा , सम्पदा , भूमि पर उन्ही विदेशियों का  नियंत्रण  रहा।  विश्व युद्ध में भारतीय सैनिक ,ब्रिटिश साम्राज्य के आधीन मरते रहे ,उनके चमचे जनता को जानकारी देना नहीं अपितु खूब शोषण करने में लगे थे।  वीर सावरकर भारत माता के ऐसे सपूत थे जिन्होँने हिन्दू महासभा का अध्यक्ष होने के उपरांत हिन्दुओं को विश्व युद्ध में ब्रिटिश सरकार का समर्थन करने और हथियारों का अधिक से अधिक प्रशिक्षण लेने का आवाह्न किया जिसका परिणाम यह हुआ की विश्व युद्ध से घिरी  ब्रिटिश सरकार ने  भारत के वीर नौजवानों को  बन्दूक ,तोप ,गोला-बारूद के जखीरे ,अनेक उत्पादक क्षेत्र ,संस्थानों का मुखिया बनाया । गा...

पुराण प्रसंग ,सभी करें प्रयोग

हिन्दुओं को वीर, योग्य , बहादुर ,सत्यवादी,दक्ष बनने  लिए प्रतिदिन पुराणों का अध्ययन  करना चाहिए फिर प्रयोग भी करना चाहिए। पुराण  में एक प्रसंग आता है कि एक रात पाण्डवों  और श्री  कृष्ण जी को एक दुष्ट राक्षस  के क्षेत्र में विश्राम करना पड़ा। वह राक्षस सोते और भयभीत व्यक्ति का धोखे से भक्षण करता था। इस  क्षेत्र में अर्जुन ,भीम और कृष्ण ने  २-२ घंटे रात्री सुरक्षा चौकीदारी का जिम्मा लिया   ।   पहले राक्षस खुश हुआ परन्तु अर्जुन को  सुरक्षा चौकीदार देख कर वह युद्ध करने लगा ,अर्जुन उसके छल ,और पराक्रम को देख कर भय खाने लगा जिससे  वह राक्षस ज्यादा आक्रामक और विशाल हो गया  और  अर्जुन को  उसने पटक पटक के मारा परन्तु जब अर्जुन के  २ घंटे पूरे होने लगे तो वह  उबासी लेने लगा तो राक्षस ने भी उसे सोने को कहा और राहत महसूस की।  अर्जुन  सोचने लगा कि अब  भीम इसे जरूर मरेगा।   अर्जुन ने भीम को जगाया और रा...

स्वामित्व योजना

श्रीमान जय राम ठाकुर जी मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश।     नमस्कार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंचायती राज दिवस के मौके पर  स्वामित्व योजना की शुरुआत की। इस योजना के माध्यम से देश के ग्रामीण इलाकों में आवासीय जमीन का मालिकाना हक आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए किया जा सकेगा। इस योजना में ग्रामीण इलाकों की जमीन की ड्रोन की मदद से पैमाइश हो सकेगी।  इस योजना का उद्देश्य संपत्ति का रिकॉर्ड बनाना तथा उसका स्वामित्व तय करना है। इस योजना के लॉन्च करने के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देशभर की ग्रामपंचायतों से वीडियो कन्फ्रेंसिंग भी की। जानिए ' स्वामित्व योजना ' के फायदे और खास बातें- 1-   स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों की आवासीय जमीन का स्वामित्व तय करना और उसका रिकॉर्ड बनाना। 2- इस योजना की शुरुआत भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के तहत  पंचायती राज दिवस के मौके पर की गई। 3- जब से यह सामने आया कि ग्रामीणों के पास उनकी आवासीय जमीन का कोई रिकॉर्ड नहीं और न ही इसे साबित करने के लिए उनके पास कोई दस्तावेज नहीं है। ...

प्रायोगिक विज्ञान

देश में विज्ञान के  प्रयोग का प्राचीन इतिहास रहा है। गुलाम और आजाद भारत में  गुरुगोरखनाथ ,योगानंद ,चरक ,भरद्वाज ,पतंजलि ,भास्कर, आर्यभट्ट, हरगोविंद खुराना,विक्रम साराभाई , भलखू ,रमन ,होमिजहाँगीर भाभा , एपीजे अबुलकलाम  अदि अदि को शिक्षा क्षेत्र में नगण्य स्थान दिया गया। यही कारण है कि देश की जनता को अपूर्ण शिक्षित नेता, प्रशासक, न्यायविदों के फैसले को अपनाने से अन्याय ,भ्रष्टाचार ,आतंकवादी , अवैध कब्जाधारी ,नशेड़ी ,वन कटुओं ,नदी प्रदूषकों , नकलची शिक्षार्थियों  का प्रकोप , क्रोध, गुस्सा ,झूठी ख़बरें ,धर्म  परिवर्तन , जनसँख्या विस्फोट, रोग विस्फोट, गरीबी  विस्फोट को सहने को मजबूर होना पड़  रहा है ।  

विदेशी आक्रमणकारियों ने भारतीयों में कैसे फूट डाली और राज किया।

  भारतीय जाती प्रथा --ब्राह्मण ,क्षत्रिय , वैश्य ,शूद्र जो कि पूर्णतया कर्म , रोजगार ,क्षेत्र पर आधारित थी उसमे विदेशी आक्रमणकारि   खुद एक प्रतिभागी बने और पूरे समाज में विद्वेष फैलाया। विदेशी कार्यों के  पसंद वालों ने सरकारी पैसों / जागीर और इनाम के लालच में जातिगत खूब कहानियां बनाई ---चार जातियों को हजारों जातियों में बाँट दिया।  एक ही जाती ,परिवार के लोग आपसी दुश्मन बना दिए।विदेशियों के पैसे से  पुस्तकें छाप दी , वेद पुराणों को न मानने वाले पंथ ,सम्प्रदाय ,डेरे , गुरु ,संत  बना दिए और प्रचार किया।  परिणाम हुआ कि मुफ्त के पैसे , जागीर , इनाम और पद  के चक्कर में खूब फूट  डाली और धर्म परिवर्तन करवाया। जो वीर ,ईमानदार सनातनी थे वो चुन चुन कर  फांसी ,   मरवा  दिए। कृत्य :  धर्म की रक्षा के लिए गुरुनानक देव ने शिष्य बनाये ,इन्हें ही गुर सिख कहा गया। आगे गुरुओं की शिक्षा से वीर पैदा हो रहे थे।  गौ , हिन्दू परम्परा की बढ़ोत्तरी से डर  कर  मुग़लों  ने गुरुओं व सिखों की बहुत ह...

दैवी या आसुरी कृत्य भारत की एक खोज

भारवासियों ने देखा कि २०१४ -२०१८ ,-२०१८ -२०२०  में देशवासियों को आधार कार्ड , जनधन अकाउंट , किसान सम्मान योजना अकाउंट , वृद्धावस्था  पेंशन योजना अकाउंट , किसान सम्मान योजना अकाउंट , मुफ्त एलपीजी सिलिंडर योजना , शौचालय योजना   अदि के लिए  सरकार ने खूब प्रचार किया ,बैंक अधिकारियों को घर -गांव शहर भेजा ,  डाकघरों को बैंक बना दिया , स्कूल- कॉलेज ,यूनिवर्सिटीज में प्रचार , ऑनलाइन पेमेंट के लिए भीम , पेटम ,फ़ोन पे , बैंकों की  एप बनवाई।  दैवी -आसुरी कृत्य वाले अपने एजेंडे में सक्रिय  हो गए।  दैवी विचार वालों ने उपरोक्त योजनाओं की खूब अच्छी बातें बताई ,प्रचार किया ,लोगों की सहायता की , बैंकों में खाते खुलवाए ,योजनाओं का फॉर्म भरा ,अकाउंट खुलवाया , शिक्षित किया और उपलब्ध रहे।  उसका परिणाम हुआ की करोड़ों लोग बैंकों , डाकघरों से जुड़े।  उनको नोट- बंदी , योजनाओं-ऋण अदि में  तथा  लोक-डाऊन  करोना काल में पेंशन ,जनधन ,गरीब योजना , मुफ्त राशन के लिए  केंद्र / राज्य सरकारों से   स...

युवाओं को फ़ौज में भर्ती ऐसे करें।

 युवाओं को  फ़ौज में  भर्ती ऐसे करें।  हमारे देश के  पाकिस्तान , चीन  के साथ सीमावर्ती राज्यों ,नक्सली क्षेत्र के राज्यों, उपद्रवी संगठनों से जूझ रहे राज्यों से फ़ौज में अधिक भर्ती की जाए। इन्हीं  प्रशिक्षित फौजियों को राज्य सुरक्षा बलों की भर्ती में आरक्षण दिया जाये।                                                                                    

मन्दिरों की संपत्ति

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री श्री चव्हाण जी सरकार को राय दी है कि मंदिरों का सोना अधिग्रहण करने के बाद इससे संकट काल में कमाई करे।  मंदिरों के महंतों को मै आगाह करता हूँ कि ये राजनैतिक दल सबसे अधिक दानकर्ता हिन्दुओं के मंदिरों की संपत्ति पर गिद्ध दृष्टि इसलिए है कि क्योंकि आप लोग तयाग की प्रतिमूर्ति संतों और साधुओं और सनातनी आश्रमों को अलग समझते हैं। इष्ट  मंदिरों के कल्याणों की कोई जिम्मेवारी नहीं डालते। तयाग की प्रतिमूर्ति  सन्यासी, अखाड़ों के ब्रह्मचारियों ,योगियों को शामिल नहीं करते ।  एरा -गेरा  दबाव ग्रुप  ,नेताओं ,प्रशासकों  ,भाई भतीजों का ट्रस्ट में बोल-बाला होता है।  ये ट्रस्टी सरकार के अन्याय के विरुद्ध  जुबान खोलने का साहस नहीं करते। इसलिए मंदिर की  संपत्ति ,सोना सरकार द्वारा कमाई का साधन बनाने को कहते हैं। १)अतः मंदिर की आय से सस्ती धार्मिक किताबें छपवानी चाहिए जो गीता प्रैस गोरखपुर कर रहा है। २) अपने कल्याणों ( वो परिवार जिन्होंने जमीन दान दी वो परिवार ,मंदिर बनाने में  तन /वस्तु /ध...

सनातन सीख

आज के युग में माता -पिता ,भाई -बहिन ,बंधू बांधव से अधिक प्रचार प्रसार , सूचनाओं तथा भौतिकतावादी सोच का बोल बाला है ,उसमें हमारे रिश्ते कमजोर हो रहे हैं। मुझे बचपन याद आ रहा जब मेरे माता-पिता , बुब्बा  जी बुआजी , नांना -नन्नी जी कड़क रिश्तों के सम्मान सूचक निर्देश देते थे वह आज भी प्रासंगिक है । अतः  अपने से बड़ों से जब भी बात करें तो रिश्तों के सम्मान सूचक शब्द का प्रयोग अवश्य करें। जैसे  माताजी ,पिता जी ,बड़े भाई जी ,मंझले भाई जी ,छोटे भाई जी ,पापाजी , मम्मी जी ,दादा जी ,दादी जी,बुब्बाजी ,जीजाजी ,दीदीजी ,मास्सी  जी  आदि आदि । गांव में दूसरी जाती के लोग भी निवास करते है ,बुजुर्गों ने उनके साथ भी रिश्ते बनाये होते हैं ,उनके अनुसार ही भावी पीढ़ी को अनुसरण करना होता है। कई बार धर्म भाई -बहिन अलग जाती से बनाने का यही तात्पर्य होता है। उच्च पद , अधिक पढ़े लिखे ,बड़े जमींदार होने पर भी कभी अपने से बड़ों का तथा बड़े रिश्तों  के सदस्यों के साथ मजाक ,अपमान वाली बहस की कभी इजाजत  नहीं हो सकती। धन्यवाद